अगर आप चीन से माल इंपोर्ट करते हैं, तो pratham afim yudh kab hua का जवाब आपको सिर्फ इतिहास के लिए नहीं, बिज़नेस के लिए चाहिए। कारण: शंघाई, गुआंगझोउ, निंग्बो, फुझौ और झियामेन — जिन पोर्ट्स से आपका कंटेनर निकलता है — इन पांचों शहरों को विदेशी व्यापार के लिए 1842 की एक संधि ने खोला था। यह लेख तारीखें रटाने के लिए नहीं है; यह दिखाता है कि 1839-1842 के उस युद्ध ने आपके आज के sourcing रूट, एक्जीबिशन कैलेंडर और नेगोशिएशन टेबल को कैसे आकार दिया — और इस जानकारी से आप प्रति कंटेनर सैकड़ों डॉलर कैसे बचा सकते हैं।

Pratham Afim Yudh Kab Hua: सटीक तारीखें और पूरी टाइमलाइन

सीधा जवाब: प्रथम अफीम युद्ध सितंबर 1839 में शुरू हुआ और 29 अगस्त 1842 को नानजिंग संधि (Treaty of Nanking) के साथ खत्म हुआ — यानी लगभग 3 साल। कहानी 10 मार्च 1839 से शुरू होती है, जब चिंग सम्राट ने लिन ज़ेशू को कैंटन (आज का गुआंगझोउ) भेजा ताकि अफीम की तस्करी रोकी जा सके। लिन ज़ेशू ने जून 1839 तक ब्रिटिश व्यापारियों से 20,283 चेस्ट अफीम (लगभग 12 लाख किलो) जब्त करके हुमेन में नष्ट कर दी। उसके बाद घटनाएं तेजी से बिगड़ीं:

  • 4 सितंबर 1839: काउलून के पास पहली नौसैनिक टकराव — युद्ध की शुरुआत
  • जुलाई 1840: ब्रिटिश युद्धपोतों की बेड़ी चीन पहुंची, झोउशान द्वीप पर कब्जा
  • अक्टूबर 1841: झियामेन और निंग्बो ब्रिटिश नियंत्रण में
  • 21 जुलाई 1842: झेनजियांग की लड़ाई में चिंग सेना की फैसलाकुन हार
  • 29 अगस्त 1842: HMS Cornwallis जहाज पर संधि पर दस्तखत

प्रथम अफीम युद्ध क्यों हुआ — तीन आर्थिक वजहें

1830 के दशक तक �