2024 की पहली तिमाही: भारत-चीन व्यापार असल में कहां जा रहा है

मैंने इस साल की पहली तिमाही का डेटा खुद देखा. भारत ने चीन से $24.8 बिलियन का माल मंगाया, जो 2023 की उसी अवधि से 12% ज्यादा था. उधर हमारा निर्यात सिर्फ $3.2 बिलियन रहा. व्यापार घाटा $21.6 बिलियन छू गया. अब आपके लिए इसका मतलब क्या है? मेरे अनुभव में जब चीन का घरेलू बाजार सुस्त पड़ता है, तो वहां के सप्लायर कीमत पर समझौता करने को तैयार रहते हैं. यह आपके लिए मौका भी है और रिस्क भी, क्योंकि घटिया सप्लायर भी इसी दौर में सक्रिय हो जाते हैं.

कौन सी श्रेणियां सबसे ज्यादा चल रही हैं

इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल घटक

कुल आयात में इलेक्ट्रॉनिक्स का हिस्सा 34% है. इसमें मोबाइल फोन पीसीबी, बैटरी और चिप्स आते हैं. दिल्ली के एक आयातकर्ता ने मुझे बताया कि शेन्झेन से फोन पार्ट्स का ऑर्डर उन्हें 18% सस्ता पड़ा, क्योंकि चीन ने निर्यात शुल्क में 5% कटौती की थी. लेकिन एक बात भूलिए मत. BIS प्रमाणपत्र जरूरी है. बिना BIS के माल भिजवाया तो कस्टम पर शिपमेंट कम से कम 15 दिन रुकेगा और ₹2.5 लाख तक का जुर्माना लग सकता है. मैंने खुद देखा है कि लोग सैंपल अप्रूव कराने में जल्दी करते हैं और कागजी काम आखिर में देखते हैं. यही गलती सबसे महंगी पड़ती है.

मशीनरी और औद्योगिक उपकरण

मशीनरी आयात 2024 में 22% बढ़कर $18.5 बिलियन पहुंचा. सबसे ज्यादा मांग CNC मशीन (₹12-18 लाख प्रति यूनिट) और टेक्सटाइल प्रिंटिंग मशीन की है. गुजरात के एक व्यापारी ने SimpleChinaSourcing.com के जरिए हांग्जो की फैक्ट्री से 5 मशीनें मंगाईं. कुल बिल ₹94 लाख बना. वही ऑर्डर सीधे Alibaba पर करते तो ₹1.12 करोड़ चुकाने पड़ते. फर्क सिर्फ कीमत का नहीं है. फैक्ट्री ऑडिट के बिना आपको यह भी पता नहीं चलता कि सामने असली यूनिट है या सिर्फ ट्रेडिंग कंपनी. 2024 में 37% नकली निर्यातक पकड़े गए, जो क्वालिटी के नाम पर धोखा दे रहे थे. एक कमी यह भी बता दूं: ऑडिट के बाद भी प्रोडक्शन के दौरान क्वालिटी गिर सकती है, इसलिए मिड-प्रोडक्शन इंस्पेक्शन अलग से करवाना पड़ता है.

टैरिफ, लॉजिस्टिक्स और नए नियम

2024 के टैरिफ बदलाव

भारत सरकार ने चीन से आने वाली इलेक्ट्रॉनिक्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10% से बढ़ाकर 15% कर दी. मशीनरी पर 7.5% ही रही. IFSC (इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर) के रास्ते किए गए आयात पर 2% रियायत मिलती है. मुंबई के एक खरीदार ने इसी रास्ते से ₹8 लाख बचाए. रियायत अच्छी है, पर इसका प्रोसेस भारी है. छोटे आयातकर्ताओं के लिए इसका कागजी काम असल में परेशान करता है, यह पहले से जान लें.

फ्रेट और लीड टाइम

शंघाई से मुंबई के 20-फुट कंटेनर का फ्रेट 2024 में ₹1.8 से 2.2 लाख है. पिछले साल से 8% सस्ता. अच्छी खबर यही खत्म. बंदरगाहों पर भीड़ बढ़ रही है और मुंबई पोर्ट पर क्लियरेंस में 4-7 दिन लगते हैं. मेरी सलाह है कि FOB की जगह CIF शर्तों पर डील करें, ताकि फ्रेट का कंट्रोल शिपर के पास रहे. हां, CIF में भी डिस्चार्ज के बाद के चार्ज आपके ही होते हैं. यह शर्तें पहले से साफ कर लें.

वो गलतियां जो आपको ₹20 लाख तक का नुकसान करा सकती हैं

  • गलत HS कोड: कोलकाता के एक आयातकर्ता ने मशीनरी पर HS 8479 लगा दिया, जबकि सही कोड HS 8462 था. नतीजा: ₹8.4 लाख की अतिरिक्त ड्यूटी. हर बार ICEGATE पर कोड वेरिफाई करें, चाहे पुराना ऑर्डर ही दोहरा रहे हों.
  • बिना सैंपल के ऑर्डर: 23% आयातकर्ता मानते हैं कि पहले ही ऑर्डर में क्वालिटी इश्यू आया. चीन से सैंपल ₹12,000 से 25,000 में आता है और 2024 में इस खर्च को ऑर्डर में एडजस्ट करने का चलन नहीं है. अलग से भुगतान करें और इसे निवेश समझें.
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