अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मुनाफा केवल सही उत्पाद खरीदने से नहीं, बल्कि शिपिंग और कस्टम क्लीयरेंस की पारदर्शिता पर निर्भर करता है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, लाल सागर (Red Sea) संकट और अन्य भू-राजनीतिक कारणों से समुद्री माल ढुलाई किराये में 15-20% की वृद्धि दर्ज की गई है। यदि आप भारत या किसी अन्य देश में चीन से माल आयात कर रहे हैं, तो एक सटीक global supply chain analysis के बिना आप हर शिपमेंट पर लाखों रुपये गंवा सकते हैं। यहां हम व्यावहारिक आंकड़ों और कार्यनीतियों के साथ जानेंगे कि अपनी आपूर्ति श्रृंखला को कैसे अनुकूलित करें।
Global Supply Chain Analysis के ज़रिए बेसलाइन लॉजिस्टिक लागत की गणना
खरीदार अक्सर केवल फैक्ट्री कीमत (EXW) या FOB मूल्य देखकर ही फैसला कर लेते हैं, जो कि एक घातक निर्णय है। एक विस्तृत विश्लेषण में आपको फ्रेट चार्ज (महासागर या वायु), पोर्ट ड्यूटी, कस्टम एजेंट फीस, और अंतिम मील (Last-mile) डिलीवरी की कुल लागत की गणना करनी चाहिए। उदाहरण के लिए, शेन्ज़ेन से मुंबई तक 40 फीट के एक नॉर्मल कंटेनर (FCL) का वर्तमान किरा�
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