चीन से पहला बल्क ऑर्डर देते वक्त डर एक ही होता है। 30% एडवांस पेमेंट भेज दिया और सप्लायर कार्गो न भेजे तो? 2023 के ग्लोबल ट्रेड डेटा के मुताबिक, इंटरनेशनल बायर्स के 68% फ्रॉड और क्वालिटी डिस्प्यूट केसेस की जड़ गलत पेमेंट टर्म्स हैं। मैंने Simple China Sourcing पर कई इंपोर्टर्स को देखा है जिन्होंने TT पेमेंट में जल्दबाजी की और पैसा डूब गया। इसीलिए ‘letter of credit in chinese meaning’ को समझना जरूरी है। LC कोई साधारण डॉक्यूमेंट नहीं है। यह आपके बैंक की ओर से दी गई लिखित गारंटी है कि सप्लायर शर्तें पूरी करेगा, तभी पैसा जाएगा।

‘Letter of Credit in Chinese Meaning’ (信用证) का सीधा अर्थ

चीनी भाषा में Letter of Credit को 信用证 (Xìnyòng zhèng) कहते हैं। तीनों अक्षरों का मतलब समझ लीजिए तो आधा काम समझ गए। 信 यानी ट्रस्ट या क्रेडिट। 用 यानी यूज़ या ट्रांजेक्शन। और 证 यानी सर्टिफिकेट या प्रूफ। चीनी सप्लायर से ईमेल में लिखें “We will pay by Xìnyòng zhèng”, तो वह तुरंत समझ जाएगा कि आप बैंक के जरिए सुरक्षित पेमेंट चाहते हैं।

इस पूरे सेटअप में चार पार्टी होती हैं: आप (Applicant), आपका बैंक यानी Issuing Bank, सप्लायर का बैंक यानी Advising Bank, और सप्लायर (Beneficiary)। आपका बैंक लिखित वादा करता है कि सप्लायर बिल ऑफ लेडिंग, इंस्पेक्शन सर्टिफिकेट जैसे तय डॉक्यूमेंट्स पेश कर दे, तो पेमेंट जारी हो जाएगा। यानी पैसा भरोसे पर नहीं, कागज़ी सबूत पर निकलता है।

वास्तविक उदाहरण: मुंबई के एक इलेक्ट्रॉनिक्स इम्पोर्टर ने शेन्जेन की एक फैक्ट्री से $45,000 का ऑर्डर दिया। उन्होंने 100% TT (Telegraphic Transfer) की जगह Irrevocable LC खोला। कार्गो में 30% डिफेक्टिव पीसेस निकलीं। क्योंकि LC में इंस्पेक्शन सर्टिफिकेट की शर्त लिखी थी, बैंक ने पेमेंट रोक दिया। अगर वे पूरा पैसा TT से भेज चुके होते, तो रिफंड की लड़ाई महीनों चलती।

LC की प्रोसेस, स्टेप बाय स्टेप

  • सप्लायर के साथ Proforma Invoice और पेमेंट टर्म्स फाइनल करें। LC acceptable है या नहीं, पहले ही पूछ लें।
  • अपने बैंक से LC खुलवाएं। भारत में यह आमतौर पर 5 से 7 वर्किंग डेज़ लेता है।
  • Issuing Bank LC को सप्लायर के Advising Bank को भेजता है।
  • सप्लायर माल शिप करके तय डॉक्यूमेंट्स अपने बैंक में जमा करता है।
  • डॉक्यूमेंट्स शर्तों से मैच हुए तो पेमेंट रिलीज़। नहीं मिले तो discrepancy का नोटिस आप तक आता है।

LC के असली नुकसान, जो कोई आसानी से नहीं बताता

मेरे अनुभव में LC हर ऑर्डर के लिए सही नहीं होता। कुछ कड़वी सच्चाई पहले जान लीजिए।

  • खर्चा: भारतीय बैंक LC खोलने के लिए LC वैल्यू का 0.5% से 1.5% तक चार्ज करते हैं। ऊपर से amendment और discrepancy फीस अलग। $45,000 के ऑर्डर पर यह रकम 30 से 40 हजार रुपये आसानी से निकल जाती है।
  • डॉक्यूमेंट की सख्ती: UCP 600 नियमों के तहत बैंक सिर्फ कागज़ चेक करता है, माल नहीं। सप्लायर के नाम में एक spelling की गलती और पेमेंट फीस के साथ अटक जाता है।
  • समय: TT पेमेंट कुछ घंटों में पहुंच जाता है। LC में शिपमेंट के बाद भी पैसा रिलीज़ होने में 1 से 2 हफ्ते लग सकते हैं।
  • छोटे सप्लायर ठिकठेक: शेन्जेन की छोटी फैक्ट्रियां अक्सर LC का झंझट नहीं झेलतीं। मेरे कुछ क्लाइंट्स से तो सप्लायर्स ने LC पर 3 से 5% ज्यादा दाम मांगे।

कब LC लें और कब बिल्कुल न लें

मेरा साफ नियम है। $20,000 से ऊपर के पहले ऑर्डर में Irrevocable LC लें। नया सप्लायर हो तो यह रकम $15,000 तक खींच लीजिए। वहीं ऑर्डर $5,000 से कम हो और सप्लायर पुराना वेरिफाइड हो, तो 30% TT एडवांस और 70% बिल ऑफ लेडिंग कॉपी के खिलाफ ज्यादा practical रहता है। वरना बैंक का चार्ज ही आपका मुनाफा निगल जाएगा।

और एक जरूरी बात। LC आपको क्वालिटी की गारंटी खुद से नहीं देता, वह तो डॉक्यूमेंट देखता है। इसलिए LC की शर्तों में third-party इंस्पेक्शन जरूर जोड़ें, जैसा मुंबई वाले इंपोर्टर ने किया था। सही पेमेंट टर्म्स और सही इंस्पेक्शन, दोनों साथ चलें तो चीन स